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कांचनार गुग्गुलु परिचय एवं प्रयोग

Kachnar Guggulu Baidhynath
कांचनार गुग्गुलु के फायदे
कांचनार गुग्गुलु का उपयोग विशेषकर ग्रंथि (गाँठ) नाश करने के
 लिए ही किया जाता है। ये गाँठ वात और कफजन्य हुआ करती हैं।
 गलगण्ड और गण्डमाला की अपक्वावस्था
अर्थात् जब इस रोग का प्रादुर्भाव ज्ञात हो, तभी से इसका उपयोग
 करना प्रारम्भ कर देने स 2 महीने में शर्तिया लाभ


 होता है, 
ऐसा मेरा अनुभव है। पुराने विकारों में अधिक समय तक
इस दवा के सेवन के साथ ही यदि बांझ ककोड़े की जड़ का
 लेप कांजी में मिलाकर गल गाँठ पर किया जाय, तो अवश्य ही 
उक्त समय तक गांठ अच्छी हो जायेगी।

गुण और उपयोग
इस गुग्गुलु के सेवन से गलगण्ड, गण्डमाला (गले में कंठ वेल होना),
अपची, ग्रन्थि, अर्बुद (रसौली), गले में और नाक के भीतर 
गांठे बढ़ना, व्रण, गुल्म, कुष्ठ व भगन्दर आदि
रोगों में अच्छा फायदा होता है।

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कांचनार गुग्गुलु का कंपोजीशन
कचनार की छाल 40 तोला, 
त्रिफला 24 तोला,
त्रिकुटा 12 तोला,
 वरुण की छाल 4 तोला, 
इलायची, दालचीनी, तेजपात-प्रत्येक 1-1 तोला -
इन सबको कूट कपड़छन चूर्ण बनावें।
सब चूर्ण के बराबर शुद्ध गुग्गुलु मिला कर, 
कूट कर, घी या एरण्ड तेल के सहारे 3-3 रत्ती
की गोलियाँ बना, छाया में सुखा कर रख ले।



मात्रा और अनुपान
2-4 गोली सुबह-शाम कचनार की छाल, और (वरुण) की छाल, गोरखमुण्डी और
खैरसार की छाल या लकड़ी के बुरादे का क्वाथ बनाकर इसके साथ दें। यदि विशेष लाभ नहीं
हो तो इसके साथ सुवर्ण भस्म अष्टमांश रत्ती और प्रवाल पंचामृत 3 रत्ती मिलाकर दें।

नोट: विशेष
गुग्गुलु, गन्धक और रसौत तीनों समभाग लेकर जल में पीस 
करके गण्डमाला पर लेप करने से भी बहुत लाभ होता है।

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