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medohar guggulu मेदोहर गुग्गुल के फायदे परिचय एवं प्रयोग


मेदोहर गुग्गुल वजन कम करने के लिए यह बहुत ही प्रभावशाली औषधि है इसका प्रयोग

 कोई भी कर सकता है मेदोहर गुग्गुलु का विशेष काम वजन कम करना है और

 इसके साथ साथ इस से रिलेटेड बीमारियों को जैसे शुगर, जोड़ों का दर्द, फैटी लीवर, 

कोलेस्ट्रॉल बढ़ा होना, पेट की चर्बी, उठने-बैठनेमें तकलीफ़ होना, 


नोर्मल जाँच रिपोर्ट

      प्राकृतिक ( नेचुरल ) धड़कन : नब्ज की रफ्तार

👉      नवजात शिशु      120 - 140 प्रति मिनट
👉      पहले वर्ष में        115 - 130 प्रति मिनट
👉      दुसरे वर्ष में         100 - 115 प्रति मिनट
👉      तीसरे वर्ष में          95 - 100 प्रति मिनट
👉     8 से 14 वर्ष की आयु तक 84 प्रति मिनट
👉     व्यसक                          72 प्रति मिनट
👉     बुजूर्ग                            76 प्रति मिनट
रोग के अनुसार रोग की हर इकाई के साथ नब्ज की धड़कन में लगभग 10 धड़कन की वृद्धी हो सकती है।

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            प्राकृतिक (नेचूरल) सांस की रफ्तार


👉 पहले वर्ष में             _________     35 प्रति मिनट लगभग
👉 दुसरे वर्ष में            __________   25 प्रति मिनट लगभग
👉 व्यसक            _____________    20 प्रति मिनट लगभग
👉 बुजूर्ग            _____________ _   18 प्रति मिनट लगभग

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         वीर्य की मात्रा
                     विर्य एक बार की मात्रा                                         6 से 7 मि० लि०
                      खुनियात (शुक्राणुओं)की मात्रा पुंसत्व 1 मि० लि०  6 से 12 करोड़ तक
                      मोहर्रक खुनियात पुंसत्व                                      75%


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           औषधि की खुराक मात्रा आयु के अनुसार

1 से 2 वर्ष के शिशु के लिए           ----       व्यस्क की खुराक का 1/6
2 से 4 वर्ष के शिशु के लिए            ----      व्यस्क की खुराक का 1/4
4 से 6 वर्ष के शिशु के लिए            ----       व्यस्क की खुराक का 1/3
6 से 9 वर्ष के शिशु के लिए            ----       व्यस्क की खुराक का 1/2
9 से 12 वर्ष के शिशु के लिए            --        व्यस्क की खुराक का 3/4


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                      नोर्मल जाँच रिपोर्ट

HAEMOGLOBIN                ______          14 से 16 ग्राम %
W.B.C       _____         5 से 8 हजार प्रति क्यूबिक मिली मीटर
R.B.C    _____          45 से 50 लाख प्रति क्यूबिक मिली मीटर
E.C.R                       _______           पहले घंटे मे 9 से 15 mm
खाली पेट शुगर              ______          80 से 120 मिली ग्राम %
खाने के बाद शुगर               ___        120 से 140 मिली ग्राम %
S. CHOLESTEROL                __         140 से 280 मिली ग्राम
BLOOD UREA                     _____        15 से 35 मिली ग्राम
S. URIC ACID                    _______        1.5 से 6 मिली ग्राम

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       नोर्मल ब्लडप्रेशर रिपोर्ट


                      SYSTOLIC             DIASTOLIC
आयु वर्षों में                कमतर         अधिकतर      =      कमतर             अधिकतर 
15   से   19__________73                81       ===         105                   120
20   से   24__________75                83        ===        108                   132
25   से   29__________76                84        ===        109                   138
30   से   34__________77                85        ===        110                   134
35   से   39__________78                86        ===        110                   135
40   से   44__________79                87        ===        112                   133
45   से   49__________80                88        ===        115                   139
50   से   54__________81                89        ===        116                   142
55   से   59__________82                90        ===        118                   144
60   से   64__________83                91        ===        131                   147

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वाजीकरण चिकित्सा के भेद


वाजीकरण चिकित्सा के भेद
मुख्य रूप से वाजीकरण चिकित्सा के तीन भेदों (प्रकारों) में विभाजित किया जा सकता
(1) कामोद्दीपन   (2) शुक्रवर्धन व शुक्र शोधन (3) वीर्य स्तम्भन
(1) शारीरिक दृष्टि से स्वस्थ व पुष्ट शरीर वाले पुरुष जो वीर्य से परिपूर्ण भी हों किन्तु किन्हीं
कारणों से कामवासना (कामोत्तेजना) जागृत न होती हो । इन्द्री में ढीलापन व सुस्ती होने से सफल
सम्भोग करने में असमर्थ हो, उनके लिए कामोद्दीन अर्थात् कामवासना उत्पन्न करने वाली औषधियों
की योजना की जाती है। अकरकरा, जायफल, जावित्री, कपूर, केसर, कस्तूरी, केचुए, कौंच के बीज,
अण्डों का सत्व, कुचला अथवा स्ट्रिकनीन, ताम्बूल (पान), योहिम्बन हाईड्रोक्लोर,


वाजीकरण का महत्व

वाजीकरण का महत्व
विवाहित पुरुषों के लिए 'वाजीकरण औषधियों का अत्याधिक महत्व है वाजीकरण द्वारा
रोगी, निर्बल व नपुंसक पुरुष भी कामशक्ति सम्पन्न और वीर्यवान हो जाते हैं। यदि स्वस्थ पुरुष भी
इन औषधियों का यथोचित सेवन करे तो अपना यौन जीवन और भी अधिक सुखमय व समधुर बना
सकते हैं । पौरुषहीन को पौरुष प्रदान करना तथा स्वस्थ्य व्यक्ति के यौन आनन्द में वृद्धि करना वाजीकरण औषधियों का प्रधान कार्य है।

वाजीकरण क्या है ?

वाजीकरण क्या है ?
वाजीकरण 'अष्टांग आयुर्वेद' का एक महत्वपूर्ण अंग है। आयुर्वेद के आठ अंग बताये गये
हैं- 1-शल्यतन्त्र 2- शालाक्य तन्त्र 3- कायचिकित्सा 4- भूतविद्या 5- कौमार भृत्य
 6- अगदतन्त्र 7- रसायन तन्त्र एवं 8- वाजीकरण तन्त्र । इन आठ अंगों में विभाजित 'वैद्यकशास्त्र' को
'अष्टांग आयुर्वेद' कहा गया है।
जिस युक्ति या औषधि द्वारा कामशक्तिहीन, क्षीणवीर्य और नपुंसक व्यक्ति भी

विर्य स्तंभन चूर्ण

                                                      विर्य स्तंभन चूर्ण

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औषधि द्रव्य
नागबला , अतिबला , खस , कौंच के शुद्ध बीज , शुद्ध भांग , गोखरू , तालमखाना
और शतावरी प्रत्येक 50-50 ग्राम, 
वंग भस्म 25 ग्राम, जायफल + जावित्री,लौंग + दालचीनी और असली अकरकरा
 प्रत्येक का चूर्ण 15-15 ग्राम लें। मिश्री की मात्रा आधा किलो कर लें।





समस्त द्रव्यों का पृथक-पृथक चूर्ण करके लिये गये वजन के अनुसार मिला लें तद्पश्चात
बंग भस्म मिलाकर सभीको एक गात कर ले 
 कर लें। अंत में पिसी मिश्री मिलाकर सुरक्षित रख लें।

कर्ण वेदना नाशक तैल,कान बहना ,कान मे दर्द या खुजली होना

कर्ण वेदना नाशक तैल,कान बहना ,कान मे दर्द या खुजली होना
सारी जानकारी विडिओ मे देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें

https://youtu.be/If1pSLuSPkE

Kalk kashay,कल्क कषाय कल्पना क्या है
काढा बनाने की विधी जानने के लिए यह विडिओ देखें
https://youtu.be/UMuRZtkLO4E
स्वरस क्वाथ कषाय,Svaras kvaath bnana,
की विधी जानने के लिए यह विडिओ देखें
https://youtu.be/KQqBurC0Zd4

***  जरूरी सूचना  HEALTH TOUCH  ***
किसी भी दवाई या औषधि का प्रयोग करने से पहले अपने किसी योग्य चिकित्सक से सलाह जरूर लें लें लें अपने आपसे कोई भी दवाई इस्तेमाल ना करें क्योंकि दवाई अलग अलग व्यक्तियों पर अलग-अलग प्रभाव डाल शक्ति है वह उनकी प्रकृति पर निर्भर करता है इसलिए चिकित्सक से परामर्श अवश्य करें
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