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स्वर्ण मकरध्वज अनुभूत प्रयोग

मुख्य द्रव्य - स्वर्ण भस्म, षड़गुण बलजारित मकरध्वज त्रिवंग भस्म, केशर, शतावरी
जीवन्ती, अतुल शक्तिदाता योग।
गुण- धर्म - स्नायु दौर्बल्य, पीयूष ग्रंथि (हारमोन्स विकास) निम्न रक्तचाप, शुक्राणु एवं
बल वर्द्धक रक्त प्रसारक।

उपयोग - यह औषधि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में हार्मोन के स्थान पर विशेष रूप से
सेवन करने योग्य है। इससे ग्रंथियां उत्तेजित होकर अधिक प्रभावशाली बनती है। यह
जरा व्याधि रोकने वाला उत्तम शक्तिवर्धक रसायन है तथा शरीर को सबल, सुन्दर एवं
है।
कान्तियुक्त बनाता है। राज्यक्ष्मा की प्रारम्भिक अवस्था, शारीरिक दुर्बलता एवं श्वास के
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लिए उत्तम है। प्रत्येक ऋतु में स्त्री-पुरुष के लिए सेवनीय है तथा ४० वर्ष के बाद अति
गुणकारी होता है । हृदय को उत्तेजित कर रक्त प्रवाह को बढ़ाता है । फलत: सम्पूर्ण शरीर
में शक्ति का संचार होता है। पाचन संस्थान द्वारा रक्त में सम्मिलित होकर यह बात
संस्थान पर विशेष प्रभाव डालकर उनकी कार्य शक्ति बढ़ाता है। अमाशय क्लेदन कफ
एवं पाचन ग्रंथियों को संतुलित करके आहार को पचाता है।
मात्रा एवं अनुपान-१ गोली मधु मक्खन या दूध से दिन में एक बार लें।
पथ्य- पौष्टिक भोजन एवं हल्का व्यायाम ।
मध्य- खटाई एवं चटपटी चीजें

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