बैद्यनाथ स्वर्ण बसंत मालती (स्वर्ण-मोती युक्त)
(भैषज्य रत्नावली)
मुख्य द्रव्य - स्वर्ण भस्म, मोती पिष्टी, शुद्ध हिंगुल, सफेद मिर्च, खरपर (यशद भस्म)
आदि।
गुण-धर्म - मस्तिष्क ज्वर, जीर्ण ज्वर, यक्ष्मा, अशक्ति, हृदय रोग, धातु-क्षीणता, प्रमेह
श्वास, श्वेत प्रदर, बहुमूत्र, पाण्डु में लाभकारी ।
उपयोग- स्वर्ण और मुक्ता के योग से बनने वाली यह महौषधि शरीर के सभी अंगों के
विचारों पर अपना खास असर दिखलाती है। यह जीर्ण ज्वर, क्षय, कास, श्वास, प्रमेह ।
पाचन विकार, धातुक्षीणता, हृदय रोग, श्वेत प्रदर, वीर्य स्त्राव, बहुमूत्र, पाण्डु, अशक्ति आदि
हमें यह अच्छा लाभ करती है। मस्तिष्क में स्फूर्ति और बल पैदा करना इसका खास कार्य
है। स्त्री-पुरुष सभी को सभी ऋतुओं में यह लाभप्रद है।
मात्रा अनुपान - १ से २ गोली तक जीर्ण ज्वर, कास-श्वास और क्षय में चौसठ प्रहरी
पीपल और मधु अथवा च्यवनप्राश के साथ सितोपलादि चूर्ण मिलाकर चाटना भी उत्तम
है। धातु-क्षीणता, प्रमेह, प्रदर, बहुमूत्र तथा सोम रोग में १२५ मिग्रा. बसन्त मालती और
२५० मिग्रा. शिलाजीत, धारोष्ण दूध के साथ और पाचन विकारों में भुने हुए जीरे और
शहद के साथ दें।
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