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बैद्यनाथ योगेन्द्र रस (स्वर्ण मोती युक्त) परिचय एवं प्रयोग


मुख्य द्रव्य - रस सिन्दूर, स्वर्ण भस्म, कान्त लौह भस्म, अभ्रक भस्म, मोती भस्म, वंग भस्म
आदि।
गुण-धर्म- उच्च रक्तचाप, हृदय अवसर, वात-पित्त उन्माद, हिस्टीरिया, पक्षघात में
उपयोगी।
उपयोग - यह रस हृदय, प्रमेह, शूल, अम्लपित्त और राजयक्ष्मा के लिए भी बहुत उपयोगी
है। यह बल-वीर्य और स्मृति वर्द्धक तथा अनेक रोग नाशक है। बीमारी के बाद की
कमजोरी को दूर कर बल बढ़ाने में अति उत्तम, रक्तचाप (ब्लड प्रेसर) अधिक हो या कम
यह निश्चित लाभ करता है। हृदय की दुर्बलता, चिन्ता, मानसिक तनाव के कारण जब
-शरीर निस्तेज हो जाए एवं मानसिक दुर्बलता महसूस हो और काम करने में मन न लगे तब
इसका प्रयोग चमत्कारिक सिद्ध होता है।
मात्रा और अनुपान - १ - १ गोली सुबह-शाम दिन में एक या दो बार मधु से पित्त
विचारों में मिश्री मिले त्रिफला के जल से हिस्टीरिया में मिश्री मिले हुए जटामांसी के जल
से हृदय रोग में अर्जुन-छाल के काढ़े के साथ और ताकत के लिए दूध के साथ प्रयोग
करें।

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